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कौन है गुरु? - 谁是精神硕士?

गुरु कौन  है ? वो जिसमें ईश्वर प्रकट हो जाएँ | कब मिलेंगे गुरु ? जब  साधना में आप प्रारंभिक स्तर पार कर  जाएँ | कौन  मिलवायेगा गुरु से? भगवान्  जब आपमें योग्यता देख लेंगे , तो वो ही गुरु से मिलाने के सारे अरेंजमेंट कर देंगे कैसे जाने के फलां ही हमारे गुरु है ? मन शांत हो जायेगा गुरु के सामने होने से , भले ही वो आपसे  १०-१२ ft दूर ही क्यों ना हो अगर आप गुरु की वन्दना मन ही मन करोगे तो भले ही आपके गुरु किसी से भी क्यों ना बात कर रहे हो , आप पर दृष्टि जरूर डालेंगे | आप चाहे तो बार बार ऐसा करके देख सकते है परिस्थितियाँ ही ऐसी बनेगी  की आप और आपके गुरु आमने सामने आ जायेंगे | और जब वो आयेंगे आपका मन ठहराव महसूस करेगा | कहाँ खोजे ? कंही ना खोजिये | सिर्फ मानसिक पूजा कीजिये ईश्वर की , योग्यता आने पर भगवान् खुद ही ढूंढ के देंगे आपके योग्य गुरु .तब तक के लिए ईश्वर   की मानसिक तस्वीर ही आपकी गुरु है | कहाँ  पायें  ? जब ईश्वर ही आपके गुरु है तो भीतर पायें अपने भीतर... सर्वप्रथम भीतर ईश्वर को अपना गुरु मान पूजते रहें | जब साधना की प्रारंभिक कक्षा पार कर लेंगे तो वो ईश्वर किस जीव अ

ऊर्जा

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ऊर्जा क्या है ,और यह   कितने प्रकार की होती है ? यदि आप विज्ञान के विद्यार्थी है | तो आपको यह पता होगा कि संसार में दिखने वाली सभी चीज़े ऊर्जा का ही व्यक्त अथवा अव्यक्त रूप है | ऊर्जा दृश्य ,अदृश्य   दोनों होती है | यही ऊर्जा जब अपने तीव्रतम रूप में होती है तो शक्ति कहलाती है | इसी ऊर्जा जो अलग अलग धर्मो में अलग अलग रूपों में व्यक्त किया गया है ,जैसे देवी, देवता , राछस , दानव , फ़रिश्ते और शैतान | अगर शरीर से सारी ऊर्जा खीच ली जाएँ तो आत्मा तुरंत शरीर छोड़ देगी |ऊर्जा की मात्रा यह निर्धारित करती है कि कौन   सा आकर , ऊर्जा लेगी - जैसे अत्यधिक तेज़   सकारात्मक ऊर्जा देवता का रूप तथा अत्यधिक नकारात्मकऊर्जा दानव का रूप लेती है | यदि आप ऊर्जा को पहचानना सीख जाएँ तो आप किसी भी व्यक्ति के वास्तविक नेचर को उसे देखते ही महसूस कर लेंगे   |   आध्यात्मिकता में ऊर्जा मुख्यतः दो रूपों में   क्रमशः  सकारात्मत ऊर्जा   ( positive energy)   , दैवीयऊर्जा \ सात्विक ऊर्जा     एवम  नकारात्मक ऊर्जा(负能量)ामसिक ऊर्जा \शैतानी शक्ति   \काली शक्ति ,बाटी गयी है | सकारात्मत ऊर्जा

ईश्वर एवं उनकी शक्तियां – भाग २

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你的ो मिली हुई शक्तियां जिन्हें हम ऊर्जा भी कहते है आपको अचंभित करने के लिए काफी है ,फिर भी इनकी मात्रा दैवीय शक्तियों की तुलना में जरा सी ही है |हालाँकि यदि ये शक्तियां आपमें जग जाये तो आपको हर प्रकार  की सुख सुविधा प्रदान करने को काफी है | जितनी भी शक्तियां ईश्वर से आपको मिली है यदि उनमे से कुछ ही जग जाये तो आपके कई काम बना सकती है | आत्मा के शरीर धारण करने के कईउद्देश्य होते है उनमे से अपनी सभी शक्तियों को जागृत कर उनका पूर्ण उपयोग और सभीशक्तियों में समर्थ होना  भी एक मुख्यउद्देश्य है | एक प्रश्न यह है की ये शक्तियां हमें दी क्यों  गयी हैं ? इस प्रश्न का उत्तर एक उदाहरण से समझते है , मान ले आपका बच्चा स्कूल जाने लायक हो गया है आप शहर का सबसे अच्छा  स्कूल अपने सामर्थ्यानुसार उसके लिए चुनते है और यही चाहते है की जिस भी क्लास तक वह स्कूल है बच्चा उस क्लास तक पूरी पढाई करे ,मान ले आखिरी क्लास 12वीं है तो आप यही अपेक्षा  करेंगे कि, बच्चा 12वीं तक पूरी पढाई करे ,और उसके बाद ही वह स्कूल छोड़े | जैसे बच्चा स्कूल में आपके सामर्थ्यानुसार प्रवेश करता है वैसे ही आत्मा कि

ईश्वर एवं उनकी शक्तियां-- भाग १

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ईश्वर एक परम चेतना का नाम है | यह वह शक्ति है जो की चैतन्य है, जगी हुई  है | सोयी हुई नहीं है | ईश्वर ऊर्जा का वह सोर्स है ,जिसका आदि अंत किसी को भी नहीं पता यहाँ  उन्हें व्यक्त करने का प्रयास भर किया गया है | ईश्वर ऊर्जा का वह आधार  है जिससे वह ऊर्जाएं पैदा होती है जो कीड़े मकोड़े जानवर मनुष्य से लेकर ब्रह्मांडों को पलों में बना और बिगड़ सकती हैं | ईश्वरीय सत्ता को अनुभव करना जितना कठिन हैं ,उतना ही आसान भी हैं |ईश्वर, परमात्मा अपने आपको अलग अलग रूपों में व्यक्त करते हैं ,इसीलिए जिसने उन्हें जैसे पाया वैसे ही और लोगो को बताया | प्रश्न यह है कि अगर  उन्हें पाना इतना ही कठिन है, तो हम आसानी से कैसे उन्हें पा सकते हैं | याद रखे कि सहज अथवा सरल जीवन जीना  ही सबसे कठिन कार्य माना जाता है, पर इन्सान शांत मन से कठिन कार्यो को भी सरल से सरल बना लेता है | ऐसा करने की शक्तियां लेकरही एक आत्मा शरीर में प्रवेश करती है | परेशानी यह है, कि हम दुनियाँ में आँखें खोलते ही अपनी शक्तियों को भूल जाते है ,जीवन के सुखद और दुखद परिस्थितियों का सामना करते हुए ,हमे अपनी इन शक्तियों का बिलकुल भी ध्यान  न